Saturday, 17 December 2016

तेरा नाम

तमन्नाओ
की सुनो तो
बातें रह गयी अधूरी !
कुछ तो हसरत होती 
अगर
तू साथ होती !
चंद इन लम्हों में
हमने
उम्र गुजार ली होती !
यूँ तो गुजरे
 कितने ही मंजर
अपनी पहचान छुपाते
हम अधूरे रह गये !
भुला भी देते
एक पलकों तुझे
कमजोर दिल
मजबूर आँखें !
ख्वाईशो के हर पन्ने पे लिखी
मैंने अपनी आरजू
हर आरजू पे
तेरा नाम !-१७.१२.२०१६

Sunday, 4 December 2016

ख्वाबो का बोझ

यूँ तो तेरी  यादें
साँसे महकाती है
पर न जाने क्यों
आँखे भर सी आई
ख्वाबो का बोझ
आंसू रख न सके ! - ०४.१२.२०१६ 

Monday, 7 November 2016

बेजुबान जिंदगी

वक्त का तराजू
इजाजत की गुंजाइश
आज लहर उठाती यादें 
इन्तेजार की राह पे 
बेजुबान जिंदगी !-०७.११.२०१६

Sunday, 6 November 2016

रूबरू

अरसो बाद रूबरू हुए
यूँ तो रिश्ता ये बरसो का
जाने अनजाने अजनबी बन से गए थे
वही सूनापन वही खामोश जुबान
आज फिर रूबरू !-०७.११.२०१६ 

इश्क़ का पता

सवाल कतारो से 
जवाब दू भी तो किसे 
सब अपने 
या तो है 
या तो बनने वाले है 
वासुदेवं कुटुम्बकम
प्यार की जुबान
कमजोर नही
बस महफूज़ रखता है
इश्क़ का पता !-०६.११.२०१६

Saturday, 29 October 2016

न सुबह हो

एक शाम
अधूरी
गुजरे यु
सुबह न हो !
एक राह
चलु
हाथो में
तेरा हाथ
मंजिल मिले
तो मौत से मिलु !
बस एक जिंदगी
सिर्फ
एक ही ख्वाइश
तू जो मेरा हो जाये
फिर न मांगू
कुछ दोबारा
खुदा से !
इबादत हो तेरी 
मेरी आँखों में 
ऐसा 
नूर हो 
जो तू न दिखे 
उस रात की 
न सुबह हो !-२९.१०.२०१६

Monday, 19 September 2016

बंजर आँखें

वो जो मौहलत
दे
पल दो पल
इश्क़ निभाले
जो अधूरे है
हम !
वो
न हो
उन्हें मंजूर
सुबह न हो
न ढले शाम !
यूँ ही गुजर जाये
जिंदगी
का मौसम
बंजर आँखें
उनकी राह तकते रहे !-१९.०९.२०१६ 

Sunday, 11 September 2016

तुमसे दूर रहना

तुमसे
दूर रहना ही
मेरी
सबसे बड़ी कमी है !
तुमसे दूर रहना
वो हर पल
मेरी कमी है !
जो दुनिया तुमसे मुझे
अलग रहने पे मजबूर करे
इस दुनिया का साथ निभाना
मेरी कमी है ! - ११.०९.२०१६ 

Saturday, 10 September 2016

तराजू

एक तराजू की 
तलाश है 
मुकम्मल जो हमें 
अपनी भी 
कीमत बता दे !
ज़माने में
न मिली
वो नजरे
नजर मिलते ही
जो जमुना बहा दे !-१०.०९.२०१६

Wednesday, 7 September 2016

नामुराद जिंदगी

जो हर लम्हा
मुझ में तू बसे
हर ख्वाब मेरा तुझसे जुड़े
जो मेरी चाहत हो बुलंद इतनी
तेरी हर मुस्कान में मैं बसु
जो आंसू कभी
छू जाये तेरी पलके
वो पल हो यूँ
मैं आंखरी सांस लू
शिकायत नहीं
उस खुदा से
मेरी हसरतो को
जो तू मिल जाये
नामुराद हो भी जिंदगी
करम हो तो इतना
तुझसे पहले मुझे मौत आये !-०७.०९.२०१६

Sunday, 4 September 2016

उनकी ख्वाहिश

उनसे ख्वाहिश
क्या पूछी
सजदे में
सर झुका बैठे !
बाहों में भर के
जो चूम लिये
होंठ उनके
पलके भीगा बैठे !
वो क्या जमाना
जो मोहब्बत की
कीमत करे अदा !
ऐ मोहब्बत
तू जिसे छुले
आदम खुदा भुला बैठे ! - ०४.०९.२०१६

Friday, 2 September 2016

जबसे तुझे छुया

जस्बातों की बंदिशे 
रूह को छूते लफ्ज़ 
बयां न हुए
फिर भी न जाने 
अनजाने में ही
दूरिया नजदीकियों में बदल गयी !
नूर की बारिश
खुली तेरी जुल्फें
तेरे बदन को छूते हम
चाँद से फिसलती चांदनी !
सजदा जो करू
तेरा चेहरा
इबादत मेरी यु तुझसे जुड़ी !
मज़हब बदल ले है मंजूर
पानी न छुया इन होंटो ने जबसे तुझे छुया !-०२.०९.२०१६

Thursday, 1 September 2016

जो तुझसे मिले

तेरे छूने से 
भीग जाता हु 
मदहोश बादल मानो 
बेवजह यु ही बरसे !
वफ़ा की इजाजत 
क्या मांगू उससे !
जो तुझसे मिला
मानो सदियों की दूरी
लम्हों की गुजारिश !
भीगे जस्बात यूँ
रूबरू न हुए
फिर खुदसे
जो तुझसे मिले !-०१.०९.२०१६

Saturday, 27 August 2016

सवाली

हम कलम लिये 
हाथ में 
कोरा कागज मानो 
सवाली !
लिखते रहे 
मिटाते रहे
खामोश नजरे बेजुबान !
रूबरू हुए
जो उनसे
मानो शिशे से टकराये !
एक वो दिन था
बिखर गये
फिर वही बरसात !
धुंदली आँखें
ना जाने
कितनी दास्ताएं अनकही !
मुड़ के ना देखा
हमने
जिस राह को !
आज वही आ रुके
उन्ही से मिले
जहा बिछरे थे !-२७.०८.२०१६

Tuesday, 23 August 2016

कर्ज

तकल्लुफ़ अदा करे 
कदरदान ये दिल 
आपका भी कर्जदार है !-२३.०८.२०१६

Sunday, 21 August 2016

पहेली

कसूर इश्क़ का था
या वक़्त का
पहेली यूँ
मानो उम्र बीत गयी !-२२.०८.२०१६

Tuesday, 16 August 2016

गुफ्तगू

गुफ्तगू  न हुई
रुस्वा मानो
चाँद जुल्फों से
एक झलक जो दिखे
मुस्कराता उनका चेहरा
तेरा गिला दामन छूते मेरे लव
भूल ही जाते सांस लेना
जो न फकत
आपकी धड़कने छू जाती !-१७.०८.२०१६

Sunday, 14 August 2016

आशिक़ दिल

चोट गहरी थी 
गहरे ज़ख्म 
इंसान को अक्सर बदल देते हैं
वो करीब आये 
इजाजत दी मोहब्बत कर 
आशिक़ दिल
यादों की दास्ताँ लिखे
भला कब तक ! - १४.०८.२०१६

Saturday, 13 August 2016

पाबन्दी

वक़्त की पाबन्दी
कुछ यूँ थी
यादें उनकी हर पल में शामिल
सिर्फ वो न मिल पाए !-१३.०८.२०१६

Tuesday, 9 August 2016

मुकम्मल न था

बस उनके दिल को ठंडक मिले
इल्जाम मंजूर था
जिद कुछ यूँ थी
उन्हें खो दे
मुकम्मल न था !-१०.०८.२०१६

अँधेरे की गहराई

वो जो आफ़ताब के
राह पे रुके
उन्हें डर क्या
अँधेरे की गहराई से !-१०.०८.२०१६

गुरुर...

उन्हें गुरुर यह
"रात चांदनी से रौशन"
हमने उजालो से
मुह मोड़ लिया !-१०.०८.२०१६

Friday, 5 August 2016

नफरत का इज़हार

तेरी ख़ामोशी को मुक़द्दर मान लेते
नफरत का इज़हार तेरी आँखों में कहाँ !-०६.०८.२०१६

जस्बात

वो खुद से ही
बाते किया करती
एक अपनापन था मानो
ये रात उसे प्यारी थी
मैं वाकिफ था
हर उस पहलु से
जिसे वो ख्वाब कहती थी
प्यार करती थी वो मुझसे
आफ़ताब भी भला छुपाये कैसे
अपने जस्बात हम भी बयां करते रह गए !-०६.०८.२०१६

इज़हार

इश्क़ का इज़हार करते उनसे
अल्फ़ाज़ अधूरे रहते
भीगी पलकों पे इजाजत लक लिहाज
पराये वो नही
यु समझिये
जता न पाए जस्बात !-०५.०८.२०१६

Wednesday, 3 August 2016

जिंदगी और मोहब्बत

अंजाम तो जिंदगी भी 
मौत का ही देती है 
मोहब्बत तो 
खूबसूरत यादों का सफर था ! - ०३.०८.२०१६

Sunday, 31 July 2016

मजबूर इश्क़

कहने को
इश्क़ मजबूर नहीं
मज़बूरी जुड़ी है तो
इन आँखों से
गवारा नहीं इसे
कोई और चेहरा !-०१.०८.२०१६

विरासत

खुदा तेरी ये कैसी विरासत
यु तो तूने इतनी वफ़ा दी
जब भी निभाई पलके भीगा दी !-३१.०७.२०१६

हर लम्हे में

तहे दिल से
ये दुआ
दुआ यूँ
तेरी वफ़ा !
मेरे ख्वाबो में
तेरी महक
मेरा हर
अहसास तुझसे जुड़ा !
मेरी पलकों पे हो
तेरा हर अश्क !
तेरे बिना न बीतें
मेरा कोई लम्हा !
मेरी दुआ हो मुकम्मल
हर लम्हे में
तुझे खुदा मांगू ! - ३१.०७.२०१६

कभी नजर मिलाओ

कभी नजर मिलाओ
फुरसत में
पलके हमारी
आज भी भीगा जाती
आपकी यादें !-३१.०७.२०१६

हर मौसम

हर मौसम है तुझसे जुड़ा
हर मौसम हो तेरी मुस्कान की तरह !-३१.०७.२०१६

Wednesday, 27 July 2016

अजीब सा सौदा

नींद से आँखों का
अजीब सा सौदा है !
भीगी पलके
लब मुस्कराये भी तो
उसे याद करके !-२८.०७.२०१६ 

पराया हक़

गुजर जाये
आज फिर से ये रात
कल भी चाँद होगा फलक पे
ख्वाब तेरे होंगे
हक़ खो चुके होंगे हम
लाजमी नहीं हमें आज भी पराया !-२८.०७.२०१६

बचपन की कीमत

उसने बचपन खोया
कीमत थी मासूमियत की !
वो आज भी नादान है
दुनिया उसे शायर करार दे बैठी !-२७.०७.२०१६

तेरी मुस्कान

हर सितम मंजूर है 
तेरी मुस्कराहट की इबादत में !-२७.०७.२०१६

Sunday, 24 July 2016

इबादत

जो कुछ अनकही
वो समझ न सके
खामोशियों की जुबान
हम कह न सके
मजबूर थी निगाहे
जो इबादत से
उठी
वही नजर आये ! - २५.०७.२०१६ 

अधूरे तेरे बिना

अहसास कुछ यूँ था
लाख मनाये फिर भी
उसी का जूनून था
इश्क़ कुछ
इस तरह था
उसके सिवा हम अधूरे थे !-२४.०७.२०१६ 

Saturday, 23 July 2016

सावन के बादल

यु तो हर एहसास है अधूरा 
न तू हो मौजूद जहां 
सावन के ये बादल
प्यासी जमीं भला बताये भी तो कैसे 
कितने अधूरे हम 
तेरे बिना !-२४.०७.२०१६

Friday, 22 July 2016

पवित्र संगम

वो जो जस्बातों की बातें करते है 
कभी पूछिए 
कच्चे धागों से क्यों बांधे उन्होंने रिश्ते 
हर संगम होता पवित्र 
यूँ ही नहीं हम उनसे मिले !-२३.०७.२०१६

मुसाफिर भी;आशिक़ भी

एक कशिश सी है 
मुसाफिर भी हु आशिक़ भी !-२२.०७.२०१६

Wednesday, 20 July 2016

बेखुदी

किसी की बेखुदी थी
जो हम भी पत्थर दिल हो गए
वरना गुलो के मौसम
हमने भी कांटे सहे गुलाबो के !-२१.०७.२०१६

बेजुबान

वफ़ा के नसीब में
लिखें जो इतने सितम
करूँ कैसे बयां
तुझसे इश्क़ है कितना !-२०.०७.२०१६

Tuesday, 19 July 2016

वफ़ा की उम्मीद

वफ़ा की उम्मीद नहीं
तुझसे !
वो बोतल वफादार है
टूट के बिखर जाती है !
बिखरे हुए हम
वफ़ा की उम्मीद नहीं
तुझसे !-१९.०७.२०१६ 

तेरी बिरहा ने

आग से इन दिनों
ठंडक है मिलती
तेरी बिरहा ने जो
इतना जलाया !-१९.०७.२०१६ 

Monday, 18 July 2016

इबादत...

अच्छे नहीं लगते
वो चौदवी का चाँद
हम कीचड़ के कमल
जरुरी नहीं हर साथ
ज़माने की गवारा हो
याद कर
कभी अपनी तन्हाइयो में
खुद को भुला कर
बुलंदी मिले हमारी इबादत को !-१९.०७.२०१६

मुड़ के न देख

मुड़ के न देख
की अब इरादा बदलना नहीं
मंजूर है हर शिकवा गिला
तेरे चेहरे पे गम जायज नहीं !-१९.०७.२०१६ 

Thursday, 14 July 2016

ऐतबार

इंतजार नहीं करते
ऐतबार हो जिनपे
हमेशा से वो अपने ही थे
लकीरो में नहीं दिल में सही !- १५.०७.२०१६ 

Monday, 11 July 2016

अधूरी हसरत

वो अधूरी हसरत
मुक़द्दर ने जिसे
इश्क़ का नाम दिया !
तेरी अश्कों की कसम
हर दुआ में हमने
तेरा ही नाम लिया !
मुसाफिर तो यु
सभी है यहाँ
फिर भी हम तुमसे मिले !
कसूर था तो इतना
चाहत की हसरत
अधूरे बयां !-१२.०७.२०१६ 

Sunday, 10 July 2016

लम्हे गिनते हुए

हम वफ़ा के मारे
उनसे इश्क़ लड़ा बैठे
वो जो गैर की अमानत !
हम अमन के रखवाले
नफरत हमें जायज कहाँ !
वो मकबरा जो मोहब्बत का
जिसे जमाना ताज बुलाता है !
हम लम्हे गिनते हुए
वो अनजाने में खुदा बदल बैठे !-११.०७.२०१६ 

‪#‎फितरत‬

ऐ ग़ालिब 
बुझ गयी शाम 
जिसके इंतजार में 
रह गए बरसते बादल
मजबूर थे हालातों से हम
वरना इंतजार कहाँ हमारी फितरत में !-११.०७.२०१६

‪#‎शुक्रिया‬

आपकी वफ़ा ने 
हमें 
फिर से शायर बना दिया !
मोहताज हुआ करते थे
काफिर से
खुदा बना दिया !-११.०७.२०१६

दास्ताँ-ए-वफ़ा

निभाने को तो 
जिंदगी का भी साथ निभाते रहे 
कभी वक़्त गुजरा 
तो कभी आंसू बहाते रहे !
एक सुकून सा था उनकी यादों में
जो हम पन्ने दर पन्ने लिखते गए !
अजीब सी कशमकश थी
वो अपनाके
पराया जताते गए !
यूँ तो ऐतबार था हमें अपने इश्क़ पे
फिर भी हम
बहते अश्को से पन्ने भिगाते गए
उन्हें मिटाते गए ! - ११.०७.२०१६

बेजुबान

इंतजार का इंतेहां लेना तो कोई आपसे सीखे हुजूर
कभी प्यार की आंधी आपको एहसास दिलाये
हमारे लफ्ज़ो में वो काबिलियत कहाँ !-११.०७.२०१६ 

Saturday, 9 July 2016

इंतजार

तुम्हारी नजरे कहती है
अब उन्हें शिकवा नहीं
हम अपने दिल को समझाए कैसे
इंतजार नहीं करते वो मुसाफिर थे !-०९.०७.२०१६ 

उनकी एक नजर

शायद वो समझे नहीं 
हम आशिक़ थे 
मुजरिम नहीं !
इश्क़ हमारा मज़हब
अल्फाज़ ना थे
भला जताते कैसे !
उनकी एक नजर
काफी थी
रूह को इबादत मिल गयी !-०९.०७.२०१६

Wednesday, 6 July 2016

यादों की नौका

कमजोर न समझना 
यादों को
इसी नौका में 
देखे हमने 
जिंदगियों को बीतते !-०६.०७.२०१६

Tuesday, 5 July 2016

काफिर

सोचता हु 
एहसास पुछु उनसे 
खुदा होने का 
जिनकी इबादत में 
हम काफिर बन गये !-०५.०७.२०१६

Monday, 4 July 2016

तमन्ना

तमन्ना इतनी सी
आंखरी सांस तक
तुझसे यूँ ही मोह्हबत करू
कभी न नम हो तेरी आँखें
जायज नहीं लगता गम से तेरा रिश्ता !-०४.७.२०१६ 

Sunday, 3 July 2016

कांच के टुकड़े

कितने ही रिश्ते बने
कितने बिखर गये
कदर थी तो उन मोतियों की
भला कांच के टुकड़े कब आपस में जुड़े !-०४.०७.२०१६

Tuesday, 28 June 2016

लफ्ज़ -ए-वफ़ा

वो रुस्वा हुआ करते थे 
उन्हें खुशियां रास ना आती
हमें आया कहा आंसू बहाना
उन्होंने यूँ वफ़ा निभाई !-२८.०६.२०१६

Monday, 20 June 2016

कुछ यूँ

थी वो हर 
मुमकिन कोशिश 
भुला दू तुझे 
यु तो 
बीत जाती सदिया 
इंतजार में
कहा थी मालूम
वक़्त की साजिस
अंजान मैं
इंतजार था तेरा
तू मिली
तो मुकम्मल मैं
फलक पे चाँद
कुछ यूँ !!! - २१.०६.२०१६

कुछ यूँ मिली नजर

वो भीगे अल्फाज
बरसो से तरसते
नजर के मंजर
नजर झुका कर
चला करते थे
कही टकरा न जाये
किसी मोड़ पर
बादल थे
छुप गया था चाँद
बादलों में
जो नजर उठाई हमने
हुए रूबरू
कुछ यूँ मिली नजर !-२०.०६.२०१६

Saturday, 18 June 2016

यलगार

ऐतबार करू 
अपने इश्क़ पे 
या दुआ में मांगू 
तेरी वफ़ा
कसमें जो 
तोड़ी तूने
खुदा से
सिफारिश
यलगार हो
साँसों से जिंदगी !-१९.०६.२०१६

Friday, 17 June 2016

इश्क़ की बुलंदी

ऐ ग़ालिब
देख जरा
मेरी
इश्क़ की बुलंदी
पता था
वो नहीं हमारे
फिर भी
दिल लगा बैठे
यूँ तो
महफ़िल सजी थी
इंतजार में
फिर भी तनहा जी लिए
पीना तो शोख से है
यादों में बहते अश्क़
जिनके लिये
निभाई जो अदा
हम होश खो बैठे
दर्द-ए-दिल
बेजुबान वफ़ा
रह गए अधूरे अल्फाज़
पलकों पे ठहरे आंसू !-१८.०६.२०१६

Sunday, 12 June 2016

हजारो पन्ने

एक बूँद भला 
दे भी क्या उस सागर को 
तेरी आँखों में लिखा 
हमने लिख डाले
हजारो पन्ने !-१२.०६.२०१६

Tuesday, 7 June 2016

खामोशियां

वो एहसास हे क्या
जो होंठों पे आये
हमने तो खामोशियों
में भी आप ही को
इरशाद किया है ! - ०७.०६.२०१६ 

Wednesday, 1 June 2016

कोई शिकवा तो नहीं......

जो न छू लू
तेरे हर एक पहलु को
जो न भीग जाऊ
तेरी बरसात में
यूँ अधूरी मेरी कहानी
वो चंद अल्फाज किसी
बेगाने शायर की
"तेरे बिना जिंदगी से
कोई शिकवा तो नहीं !"-०१.०६.२०१५

Tuesday, 31 May 2016

जीने की वजह

तेरी दर्द की गहराई
मेरे लम्हों की आरजू
तूने न मुड़के देखा
न हमने पूछी वजह
बिछड़ भी जाये तो क्या
रुस्वा जो तू हमसे
न रही जीने की वजह !-३१.०५.२०१६ 

इंकार तेरा काबुल नहीं

आसान नहीं
बिखरे टुकड़ो को जोडना
मोहब्बत हो तो
खुदा भी फकत
उतर आये जमीन पर
दिये जो आंसू तूने
बड़ी नजाकत से
संभाले इन आँखों में
जरुरत थी
भले ही बे'इजाजत
जो नूर तुझमे
क्या कीमत करू अदा
वक़्त की मोहलत
कुछ बंदिशे यूँ ही
न कह सके
जताते भी भला कैसे
तोड़ दिए शीशे
रुक्सत जो न हुए तुझसे
अब दे भी दे इजाजत
इंकार तेरा काबुल नहीं !-३१.०५.२०१६

यादों में......

प्यार का एहसास
रहे यूँही
उम्र बीत जाएं
यादों में !-३१.०५.२०१६

Sunday, 29 May 2016

अलविदा

शिद्दत जिसकी की 
शिकायत करू क्या 
हुस्न से ज्यादा 
दिल की शोहरत
वादों से
परे इंतजार
किसकी कुदरत
कैसा ऐतबार
कोरे कागज से
जा मिटा दिया
और न पुकारेंगे ! - २९.०५.२०१६

Wednesday, 25 May 2016

दस्तूर-ए-वफ़ा --- जिंदगी

जो होंठ छू गए 
तुझे 
बेवफा जिंदगी कि
आरज़ू 
न रही 
गम ही क्या
जो
दस्तूर-ए-वफ़ा
जिंदगी
भीगा दे पलकों को
लम्हें जो तेरे साथ बीतें
काटली हमने सदियाँ !-२५.०५.२०१६

Thursday, 19 May 2016

मेरा क्या तू लागे.....

इजाजत जो हो तेरी
रुखसत करे अदा
जो हर सांस पे तेरे निशान
कैसे बताये भला
कौन मेरा
मेरा क्या तू लागे !-१९.०५.२०१६

इश्क़ नामुराद

जो हो जाये
लफ्ज़ -ए- बयान
तो ये इश्क़ नामुराद
शायर भले ही हम
मौसिकी हमारी आपकी बंदगी !-१९.०५.२०१६

Tuesday, 17 May 2016

बीतें लम्हें

भूल भी जाये
हर बात तो क्या
चंद कदम
जो चले तेरे संग
कुछ यूँ बीतें लम्हें
मानो
जिंदगी मुस्कराई
बादलों में छुप कर !-१७.०५.२०१६ 

तेरे लिये

टूटे हुए तारे से 
जो निकला नूर था 
ख्वाहिशो की हसरत से 
निकले चंद अल्फाज 
जो न समझे 
इंतजार को तेरे
नहीं बन्दे वो बने तेरे लिये !-१७.०५.२०१६

Monday, 16 May 2016

इश्क़ का असर

मेरे होंठ छुं जाये
तेरे बदन के हर जर्रे को
हो इस कदर
इश्क़ का असर
मदहोश तू
मेरी बाँहों की जंजीरे
बिखर जा आज इस क़दर
ग़ालिब की कलम रुक जाये !-१७.०५.२०१६ 

तेरे सजदे में

डर तुझे खोने का नहीं
डरता हु अपने उस वजूद से
जिसने तेरे सजदे में
मुझे भुला दिया !-१७.०५.२०१६ 

Wednesday, 11 May 2016

फकीरों की सोहरत

फकीरों की सोहरत है
दौलत तो तवायफ भी कमा लेती है !-११.०५.२०१६

Saturday, 30 April 2016

मुर्दे की परछाई

मौत के सफर पे
जिंदगी का दौर
किसने देखे शमशान के आंसू
मुर्दे की परछाई ! - ३०.०४.२०१६

Wednesday, 27 April 2016

तूने जो ना कहा

शिकवा क्या करें 
वो वक़्त की साजिस थी 
किस्मत की लकीर पे 
ऐतबार न रहे 
इश्क़ जूनून कुछ यूँ 
बीतें ज़माने सुलझाते 
जिन लटों को
दिलाशा न सही
उम्मीदों की मसान
दिल -ए-नादान
तेरे लिए मुकम्मल थे
यु तो हर गम भी
तूने जो ना कहा
रोक न सकें अश्को को !-२७.०४.२०१६

Tuesday, 26 April 2016

आखरी तो नहीं

जहां यादें जुड़ी
रास्तें मुड़ गये
वो आखरी तो नहीं
लेकिन अनकही उसी से जुड़ गयी !-२६.०४.२०१६ 

अकेले हम खड़े

वो अनकही रह गयी
वो रह गए अजनबी
मुड़ गए रास्तें जहां
आज भी वही अकेले हम खड़े !-२६.०४.२०१६

Monday, 25 April 2016

वफ़ा का इकरार

कुछ इस तरह
खफा थे नगमे
हम थे लफ़्ज़ों की
तलाश में
भुला ना सके
जिस मंजर को
न जाने कब
पलके भीगा गयी
हो
लफ्ज़ -ए-बयान
को नामंजूर
कोई
करे भी तो कैसे
वफ़ा का इकरार !-२५.०४.२०१६

Saturday, 23 April 2016

कुछ इस तरह...

कुछ इस तरह 
वफ़ा के सुरूर में दुबे 
वक़्त का ना होश रहा !
सदियाँ बीत गयी 
जिसकी तलाश में 
वो मिले भी तो
दस्तक देते दरवाजे पे !-२३.०४.२०१६

Friday, 22 April 2016

तुझमे फना

जो बीतें तेरे साथ
वो वक़्त हो मेरे
तेरी खुली जुल्फें
बादल घने बरसे
परवरदिगार हो यलगार
इतनी सी बरसे उसकी रहमत
हो जाये जो तुझमे फना
होश न आये फिर हमें !-२२.०४.२०१६ 

शुक्राना

बंदिशे थी कुछ युँ
मदहोश
उन आँखों का सुरूर
कौन है ग़ालिब
कौन ये मिर्ज़ा
जो तेरे नूर में भीगे
आशिक़ी
मेरी भी रगों में समायी
जो कतरा बहा दे
दर्द -ए-दिल
न समझे
तू क्या जाने
शुक्राना करें अदा
उस खुदा का
सल्तनत में जो
उसने की
हुस्न की रुबाई !-२२.०४.२०१६ 

Wednesday, 20 April 2016

तेरा नाम रहे

कल भी बीतें
आज भी बीतें
यूँ ना बीतें
जो तेरे साथ बीतें !
जानू ना
क्या नाम दू
इस
कस्मकस को !
बुलाऊ तुझे
ईश्क़
या वफ़ा को
सुरूर का नाम दू !
न भुलाए गये
जो बीतें
ना भूलेंगे तेरे साथ के साये !
कहने को तो
ये अल्फाज़
रहे हमेशा बेजुबान !
दुआ इतनी सी
ना बीतें ये पल
बस यूँ ही
हम रहे
या ना रहे
दुआओं में
तेरा नाम रहे !-२०.०४.२०१६

Sunday, 10 April 2016

रूबरू

हम ज़माने से न हुये रूबरू 
और आप ने समझा 
हम रौशनी के लायक नहीं !-१०.०४.२०१६

अंदाज़ ए बयां

अंदाज़ ए बयां 
कुछ यु था 
वक़्त की महफ़िल 
अरमानो का जुनु(न) था 
यु तो न पीछे मुड़
देखा हमने
साहिल भी परछाई
से हुए खफा
हम चलते गए
कारवां जुडते गए !-१०.०४.२०१६

Saturday, 9 April 2016

हमारी चाहत

वो मुस्कुराहत थी तेरी
या थे दिल में दबे आंसू
नजरो छुं भी ले
चाहे भी तो कैसे कहें
हमने भी तो चाहा है
माना हमारी चाहत
खुदा को कबूल नहीं !-१०.०४.२०१६

Monday, 4 April 2016

भूले से ही

जो बीत गये
वो तेरे
जो साथ जुड़े
वो तेरे
लम्हा भर
जो तू हो साथ
वो वक़्त हो मेरे !
तनहा तो यूँ
जीते आये
सदियाँ !
आज दिखा
वक़्त का मंजर
न जाने
रुका हुआ कबसे !
शायर की मज़बूरी
तेरी जुल्फ के साये !
कुछ इस तरह
शाम ढली
न वक़्त रुका
परिंदे लौट गये !
राहों में तेरी
आज भी बिछी
नजरे हमारी
कभी आ जाना
भूले से ही !-०४.०४.२०१६

Friday, 1 April 2016

सनम तेरी कसम....

वो लम्हे तेरे साथ
मानो जिंदगी गुजर जाये
इन लम्हों की यादें
कुछ ऐसे महकाये
वक़्त का मंजर
कुछ यूँ थम जाएं
रात की परवाह
जुगनू को क्या
जब तुम साथ हो
दामन तेरा
मेरा हाथ
बहती हवाएं बदले रुख
किसकी अदालत किसका हक़
जो वक़्त ने चाहा
तो खुदा गवाह
सनम तेरी कसम ! - ०२.०४.२०१६

Thursday, 31 March 2016

अनकही ......

अनकहे कुछ लफ्ज़
बेजुबान
दिल की दास्ताँ करे बयान !
हर मंजर से उठता धुंआ
जब तु रूठ जाये
छुप जाये चाँद भी
बादलों में !
नींद से रूठी
बेजुबान आँखें
बहता सावन
न जाने
किसका है इंतजार !
तू छू गयी
कुछ इस तरह
राहों ने दुरी निभाई
हम चलते रहे
उम्मीद में !
तू फिर नजर न आयी
गुजारिश इतनी सी
बहती अश्को ने की है
खुश रहे तू सदा
दुआ ये मेरी है !-३१.०३.२०१६

Wednesday, 30 March 2016

आप मुस्कराये......

ख्वाहिशे बेजुबान
अकेली राहें
एक रौशनी की तलाश
शायर की जुबानी
दास्ताँ-ए-जिंदगी !
टूटते-बिखरते
डूबते ऊभरते
कुछ एहसास
कुछ यादें
लमहों की दास्ताँ !
कब तक यूँ ही
खामोशियां सहे
कुछ लफ्ज़ आपके
कुछ नगमे हो हमारे !
यूँ तो न बिताये गुजरे
ये थोड़ी सी जिंदगी
हो आपका साथ
बात हो कुछ और ही
कुछ ईस तरह
धागे पिरोये हम भी शब्दों में
हसरत हो हमारी
और आप मुस्कराये ! - ३१.०३.२०१६

Tuesday, 29 March 2016

न जाने क्यों ........

ऊजर गए चमन 
बिखर गए सावन 
सड़कों पे अंजान रात 
करे रौशनी से गुफ्तगू !
कोई न जान सके 
अनकहे वो किस्से
किसका है इंतजार
ए दिल-ए-बेक़रार !
वो भूली दास्ताँ
जिसने किया
वफ़ा को मजबूर
कुछ मेरा था
कुछ तुम्हारा
वो हम थे पर
न कुछ था हमारा !
थी बंदिशे जो
थी जुस्तुजू वो
न हो पाई बयांन
कितने दफे यूँ ही
आज भी हम
यादें तलाशते
न जाने क्यों !!!
गुजर गयी
कई रातें यूँ ही
आज भी गुजर जाएगी
तन्हाइयो की महफ़िल सजेगी
फिर से वफ़ा
आंसू बहायेगी
न जाने क्यों !!!
बाहार आते रहे
चले गुलशन का कारोबार
गिरते अश्को को
न मिल पाए मजधार !
दरिया ढूंढा सारा
न मिला किनारा
न जाने क्यों !!! - ३०.०३.२०१६

Tuesday, 2 February 2016

गुमनाम

Kaminey hote hai dil se
Phir bhi rehte hai dil mein
Dost hai aakhir
Dil se nikale bhi kaise......

Thursday, 28 January 2016

गुमनाम ...२

Aaj bhar ki jindagi hai
kal kisne dekha hai!
jile aaj khulke 
jeele har pal ko
kal k varose mat reh
Waqt na mera hai
naa tera hai.....
aa ab laut chale
zara najar utha k to dekh
samne tere Zindagi ka sawera hai

गुमनाम

Jina hai to jiyo Jawano jaise
Taa ki marne k baad 
aur koi naa sahi
lekin tumhari Maa
tumahara Mulk tumhe 
Yaad kare
Jai hind
aur har Maa
apne bete se kahe
har janam mein
mujhe tujh jaisa
Beta mile
Jai Jawan
Grand Salute to the Warriors