Sunday, 22 November 2020

हसरत

 हसरत ना पूछ 

ए ग़ालिब मुझसे

कई मर्तबा देखा 

मैंने 

हौसलों को टूटते

यूं तो हौसला 

बहुत है 

मुझ में 

जिंदगी जीने का

फिर कभी यूं सोचता हूं

अधूरी रहे वह हर हसरत 

जिसमें तुझे ना मांगा हो ।

Sunday, 2 August 2020

नक़ाब

जरूरते बदलती है
वक़्त बदलता है
कही चेहरे तो
कही नक़ाब बदलते है
हैरान न होना
जो कभी न रहु
इंसान की फितरत
वो घर बदलते है
परिंदे कहा आसमान बदलते है !-०२.०८.२०२० 

Thursday, 30 July 2020

मुक़द्दर

वो जो दस्तूर सा था वक़्त का
मुक़द्दर
करार दे बैठे !

रूठे थे हमसे
ऐतबार थे जो !

न सोचा न समझा
वफ़ा का गुनहगार
करार दे बैठे ! - ३०.०७.२०२०


Friday, 17 July 2020

सफ़रनामा

एक राह सी थी
जिसकी मंज़िल न मिली
एक किनारा सा था
कस्ती जहा कस्मकस में थी
मकसद तो यू मंज़िल तक का था
रास्ते रुस्वा थे हमसे
जो हम सफर तय न कर सके !-१७.०७.२०२० 

Thursday, 16 July 2020

मुकम्मल

एक दर्द जो मुकम्मल है
शायर की मानो तो
ज़िन्दगी का आखरी पन्ना
जिसे मौत कहते है
मुकम्मल हो वो हर तलाश
जो तेरे आगोश में सिमट जाऊ !-१७.०७.२०१७ 

बचपन

वो भी एक शहर था
जिसमे मेरा घर था
एक खुला सा आँगन
जिसे सब बचपन कहते थे
फिर अचानक एकदिन
अंधेरा छा गया
फिर जब सवेरा हुआ
वो खुला आँगन न रहा
बेघर मैं मेरे साथ सड़क की धूल !-१६.०७.२०२० 

मरहम

एहसासो को संजोता हु
रूह निचोड़ कर
यूँ ही नहीं
कोई शायर
बनता जनाब
दर्द को मरहम
सुकून को सौतन
बनाना पड़ता हैं !-१६.०७.२०२०


Wednesday, 15 July 2020

मुझमे तू

जो तू मुझमे है
कही और क्यों हैं
जो मै तेरा हू
तू मुझसे दूर क्यू है !-१६.०७.२०२०

Tuesday, 14 July 2020

तकाजा

उम्र का तकाजा
न कर
मोहब्बत में
ए ग़ालिब
जमाना बदलते
वक़्त नहीं लगता !-१४.०७.२०२० 

Thursday, 9 July 2020

गुलिस्तां

झरोखे को आसमान 
समझ बैठे 
नाजुक से थे वो पल 
जो तुझे अपना समझ बैठे !
इरादा था आखिर 
साथ निभाने का 
तू न सही 
तेरी यादें का गुलिस्तां बना बैठे !-०९.०७.२०२० 

जनाजा

कई काफिले गुजर रहे थे
उनमे से एक 
रिश्तो का भी था 
मैंने रोक कर पूछा 
क्या हुआ था
जनाजा मुस्कुराते हुए बोला
जनाब इश्क़ में उम्मीद न करना !-०९.०७.२०२० 

Tuesday, 7 July 2020

खुदाई

सड़क की धूल भी
है ये जानती
एहसास की आँधियों ने
न जाने कितने महल तबाह किये
शुक्र है तो बस खुदा का
जो उसने अपनी परछाई से हमें
जुदा होने न दिया !
जो वो कह देते
मुस्कुराके ऐतराज न था
हम फ़ना हो जाते ! -०७.०७.२०२०


वफ़ा का तराजू

वाकिफ तो यूँ हु मैं
इश्क़ के अंजाम से
चाहता हू तो बस
वसीहत में इश्क़ लिखा हो !
यूँ तो शौक
और भी है ज़माने में
मगर कम्बख्त एहसास
तराजू से न तुलते ! -०७.०७.२०२०

ऐतबार

ऐतबार न कर हमेशा
अपने जस्बातों का
ए ग़ालिब
हमने डूबते हुए देखा
कश्तियों को किनारे पर !-०७.०७.२०२० 

Tuesday, 30 June 2020

काफिराना

वफ़ा उर्फ़ मोहब्बत
आशिक़ उर्फ़ आदम
अदा उर्फ़ हुस्न
घायल उर्फ़ बेइलाज
तवज्जो उर्फ़ उनका
काफिराना आँखें हमारी !-३०.०६.२०२०