हसरत ना पूछ
ए ग़ालिब मुझसे
कई मर्तबा देखा
मैंने
हौसलों को टूटते
यूं तो हौसला
बहुत है
मुझ में
जिंदगी जीने का
फिर कभी यूं सोचता हूं
अधूरी रहे वह हर हसरत
जिसमें तुझे ना मांगा हो ।
तेरे बिना ,हर पल,हर दिन,हर मंजर तेरे बिना !तुझे छूके गुजरे हवाये ;मेरी नजर आज भी तुझे ढूंढे ! हर लम्हा तेरी यादों का कर्जदार रहे ये मेरा दिल ;भुला न पाएंगे तुझे तू याद करे न करे तेरी यादों के सहारे ये जिंदगी बितानी हमने बस इतनी सी ख्वाहिश !मेरे दिल के कुछ चंद अरमान ;कुछ लफ्ज़ कुछ लम्हें जिन्हे शायद वक़्त से पहले कोई न समझ पाया न कभी पायेगा !इस न चीज की नुमाइश आप सब के सामने ,उम्मीद रखता हु आप सब को पसंद आये !
हसरत ना पूछ
ए ग़ालिब मुझसे
कई मर्तबा देखा
मैंने
हौसलों को टूटते
यूं तो हौसला
बहुत है
मुझ में
जिंदगी जीने का
फिर कभी यूं सोचता हूं
अधूरी रहे वह हर हसरत
जिसमें तुझे ना मांगा हो ।