Tuesday, 28 June 2016

लफ्ज़ -ए-वफ़ा

वो रुस्वा हुआ करते थे 
उन्हें खुशियां रास ना आती
हमें आया कहा आंसू बहाना
उन्होंने यूँ वफ़ा निभाई !-२८.०६.२०१६

Monday, 20 June 2016

कुछ यूँ

थी वो हर 
मुमकिन कोशिश 
भुला दू तुझे 
यु तो 
बीत जाती सदिया 
इंतजार में
कहा थी मालूम
वक़्त की साजिस
अंजान मैं
इंतजार था तेरा
तू मिली
तो मुकम्मल मैं
फलक पे चाँद
कुछ यूँ !!! - २१.०६.२०१६

कुछ यूँ मिली नजर

वो भीगे अल्फाज
बरसो से तरसते
नजर के मंजर
नजर झुका कर
चला करते थे
कही टकरा न जाये
किसी मोड़ पर
बादल थे
छुप गया था चाँद
बादलों में
जो नजर उठाई हमने
हुए रूबरू
कुछ यूँ मिली नजर !-२०.०६.२०१६

Saturday, 18 June 2016

यलगार

ऐतबार करू 
अपने इश्क़ पे 
या दुआ में मांगू 
तेरी वफ़ा
कसमें जो 
तोड़ी तूने
खुदा से
सिफारिश
यलगार हो
साँसों से जिंदगी !-१९.०६.२०१६

Friday, 17 June 2016

इश्क़ की बुलंदी

ऐ ग़ालिब
देख जरा
मेरी
इश्क़ की बुलंदी
पता था
वो नहीं हमारे
फिर भी
दिल लगा बैठे
यूँ तो
महफ़िल सजी थी
इंतजार में
फिर भी तनहा जी लिए
पीना तो शोख से है
यादों में बहते अश्क़
जिनके लिये
निभाई जो अदा
हम होश खो बैठे
दर्द-ए-दिल
बेजुबान वफ़ा
रह गए अधूरे अल्फाज़
पलकों पे ठहरे आंसू !-१८.०६.२०१६

Sunday, 12 June 2016

हजारो पन्ने

एक बूँद भला 
दे भी क्या उस सागर को 
तेरी आँखों में लिखा 
हमने लिख डाले
हजारो पन्ने !-१२.०६.२०१६

Tuesday, 7 June 2016

खामोशियां

वो एहसास हे क्या
जो होंठों पे आये
हमने तो खामोशियों
में भी आप ही को
इरशाद किया है ! - ०७.०६.२०१६ 

Wednesday, 1 June 2016

कोई शिकवा तो नहीं......

जो न छू लू
तेरे हर एक पहलु को
जो न भीग जाऊ
तेरी बरसात में
यूँ अधूरी मेरी कहानी
वो चंद अल्फाज किसी
बेगाने शायर की
"तेरे बिना जिंदगी से
कोई शिकवा तो नहीं !"-०१.०६.२०१५