Thursday, 1 September 2016

जो तुझसे मिले

तेरे छूने से 
भीग जाता हु 
मदहोश बादल मानो 
बेवजह यु ही बरसे !
वफ़ा की इजाजत 
क्या मांगू उससे !
जो तुझसे मिला
मानो सदियों की दूरी
लम्हों की गुजारिश !
भीगे जस्बात यूँ
रूबरू न हुए
फिर खुदसे
जो तुझसे मिले !-०१.०९.२०१६

No comments:

Post a Comment