ख्वाहिशे बेजुबान
अकेली राहें
एक रौशनी की तलाश
शायर की जुबानी
दास्ताँ-ए-जिंदगी !
टूटते-बिखरते
डूबते ऊभरते
कुछ एहसास
कुछ यादें
लमहों की दास्ताँ !
कब तक यूँ ही
खामोशियां सहे
कुछ लफ्ज़ आपके
कुछ नगमे हो हमारे !
यूँ तो न बिताये गुजरे
ये थोड़ी सी जिंदगी
हो आपका साथ
बात हो कुछ और ही
कुछ ईस तरह
धागे पिरोये हम भी शब्दों में
हसरत हो हमारी
और आप मुस्कराये ! - ३१.०३.२०१६
अकेली राहें
एक रौशनी की तलाश
शायर की जुबानी
दास्ताँ-ए-जिंदगी !
टूटते-बिखरते
डूबते ऊभरते
कुछ एहसास
कुछ यादें
लमहों की दास्ताँ !
कब तक यूँ ही
खामोशियां सहे
कुछ लफ्ज़ आपके
कुछ नगमे हो हमारे !
यूँ तो न बिताये गुजरे
ये थोड़ी सी जिंदगी
हो आपका साथ
बात हो कुछ और ही
कुछ ईस तरह
धागे पिरोये हम भी शब्दों में
हसरत हो हमारी
और आप मुस्कराये ! - ३१.०३.२०१६
No comments:
Post a Comment