मेरे होंठ छुं जाये
तेरे बदन के हर जर्रे को
हो इस कदर
इश्क़ का असर
मदहोश तू
मेरी बाँहों की जंजीरे
बिखर जा आज इस क़दर
ग़ालिब की कलम रुक जाये !-१७.०५.२०१६
तेरे बदन के हर जर्रे को
हो इस कदर
इश्क़ का असर
मदहोश तू
मेरी बाँहों की जंजीरे
बिखर जा आज इस क़दर
ग़ालिब की कलम रुक जाये !-१७.०५.२०१६
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