Sunday, 4 September 2016

उनकी ख्वाहिश

उनसे ख्वाहिश
क्या पूछी
सजदे में
सर झुका बैठे !
बाहों में भर के
जो चूम लिये
होंठ उनके
पलके भीगा बैठे !
वो क्या जमाना
जो मोहब्बत की
कीमत करे अदा !
ऐ मोहब्बत
तू जिसे छुले
आदम खुदा भुला बैठे ! - ०४.०९.२०१६

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