Monday, 19 September 2016

बंजर आँखें

वो जो मौहलत
दे
पल दो पल
इश्क़ निभाले
जो अधूरे है
हम !
वो
न हो
उन्हें मंजूर
सुबह न हो
न ढले शाम !
यूँ ही गुजर जाये
जिंदगी
का मौसम
बंजर आँखें
उनकी राह तकते रहे !-१९.०९.२०१६ 

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