Saturday, 29 October 2016

न सुबह हो

एक शाम
अधूरी
गुजरे यु
सुबह न हो !
एक राह
चलु
हाथो में
तेरा हाथ
मंजिल मिले
तो मौत से मिलु !
बस एक जिंदगी
सिर्फ
एक ही ख्वाइश
तू जो मेरा हो जाये
फिर न मांगू
कुछ दोबारा
खुदा से !
इबादत हो तेरी 
मेरी आँखों में 
ऐसा 
नूर हो 
जो तू न दिखे 
उस रात की 
न सुबह हो !-२९.१०.२०१६