आसान नहीं
बिखरे टुकड़ो को जोडना
मोहब्बत हो तो
खुदा भी फकत
उतर आये जमीन पर
दिये जो आंसू तूने
बड़ी नजाकत से
संभाले इन आँखों में
जरुरत थी
भले ही बे'इजाजत
जो नूर तुझमे
क्या कीमत करू अदा
वक़्त की मोहलत
कुछ बंदिशे यूँ ही
न कह सके
जताते भी भला कैसे
तोड़ दिए शीशे
रुक्सत जो न हुए तुझसे
अब दे भी दे इजाजत
इंकार तेरा काबुल नहीं !-३१.०५.२०१६
बिखरे टुकड़ो को जोडना
मोहब्बत हो तो
खुदा भी फकत
उतर आये जमीन पर
दिये जो आंसू तूने
बड़ी नजाकत से
संभाले इन आँखों में
जरुरत थी
भले ही बे'इजाजत
जो नूर तुझमे
क्या कीमत करू अदा
वक़्त की मोहलत
कुछ बंदिशे यूँ ही
न कह सके
जताते भी भला कैसे
तोड़ दिए शीशे
रुक्सत जो न हुए तुझसे
अब दे भी दे इजाजत
इंकार तेरा काबुल नहीं !-३१.०५.२०१६
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