Thursday, 31 March 2016

अनकही ......

अनकहे कुछ लफ्ज़
बेजुबान
दिल की दास्ताँ करे बयान !
हर मंजर से उठता धुंआ
जब तु रूठ जाये
छुप जाये चाँद भी
बादलों में !
नींद से रूठी
बेजुबान आँखें
बहता सावन
न जाने
किसका है इंतजार !
तू छू गयी
कुछ इस तरह
राहों ने दुरी निभाई
हम चलते रहे
उम्मीद में !
तू फिर नजर न आयी
गुजारिश इतनी सी
बहती अश्को ने की है
खुश रहे तू सदा
दुआ ये मेरी है !-३१.०३.२०१६

Wednesday, 30 March 2016

आप मुस्कराये......

ख्वाहिशे बेजुबान
अकेली राहें
एक रौशनी की तलाश
शायर की जुबानी
दास्ताँ-ए-जिंदगी !
टूटते-बिखरते
डूबते ऊभरते
कुछ एहसास
कुछ यादें
लमहों की दास्ताँ !
कब तक यूँ ही
खामोशियां सहे
कुछ लफ्ज़ आपके
कुछ नगमे हो हमारे !
यूँ तो न बिताये गुजरे
ये थोड़ी सी जिंदगी
हो आपका साथ
बात हो कुछ और ही
कुछ ईस तरह
धागे पिरोये हम भी शब्दों में
हसरत हो हमारी
और आप मुस्कराये ! - ३१.०३.२०१६

Tuesday, 29 March 2016

न जाने क्यों ........

ऊजर गए चमन 
बिखर गए सावन 
सड़कों पे अंजान रात 
करे रौशनी से गुफ्तगू !
कोई न जान सके 
अनकहे वो किस्से
किसका है इंतजार
ए दिल-ए-बेक़रार !
वो भूली दास्ताँ
जिसने किया
वफ़ा को मजबूर
कुछ मेरा था
कुछ तुम्हारा
वो हम थे पर
न कुछ था हमारा !
थी बंदिशे जो
थी जुस्तुजू वो
न हो पाई बयांन
कितने दफे यूँ ही
आज भी हम
यादें तलाशते
न जाने क्यों !!!
गुजर गयी
कई रातें यूँ ही
आज भी गुजर जाएगी
तन्हाइयो की महफ़िल सजेगी
फिर से वफ़ा
आंसू बहायेगी
न जाने क्यों !!!
बाहार आते रहे
चले गुलशन का कारोबार
गिरते अश्को को
न मिल पाए मजधार !
दरिया ढूंढा सारा
न मिला किनारा
न जाने क्यों !!! - ३०.०३.२०१६