Thursday, 25 May 2017

सुरुर

शराब को बदनाम
न कर ग़ालिब
सुरुर तो उनकी
आँखों से छलकता है !-२५.०५.२०१७   

चाहत न थी

आहें भरते रह गये
जिन्हे देख कर हम
उन्हें आज भी ये गुरुर
हमको उनकी चाहत न थी !-२५.०५.२०१७  

ऐतराज़ न कीजिये...

ऐतराज़ न कीजिये हुजूर
आज शबेबरात है
लफ़्ज़ों से हो बयान
वह एहसास नहीं हमारे
चाहे तो सुनले
धड़कनो की जुबान !-२५.०५.२०१७ 

Thursday, 11 May 2017

जो तेरा नहीं....

जो तेरा नहीं 
उस पे ही क्यों 
ऐतबार करता है !
ऐ दिल 
क्यों तू अक्सर 
अपने हदें भूल जाता है !
मर्ज ही तो है
जो हर दर्द हसके
सह लेता है !
वरना क्या फ़र्क़ पड़ता
इंसान तो यूँ हे भुला देता है !-११.०५.२०१७