बंदिशे थी कुछ युँ
मदहोश
उन आँखों का सुरूर
कौन है ग़ालिब
कौन ये मिर्ज़ा
जो तेरे नूर में भीगे
आशिक़ी
मेरी भी रगों में समायी
जो कतरा बहा दे
दर्द -ए-दिल
न समझे
तू क्या जाने
शुक्राना करें अदा
उस खुदा का
सल्तनत में जो
उसने की
हुस्न की रुबाई !-२२.०४.२०१६
मदहोश
उन आँखों का सुरूर
कौन है ग़ालिब
कौन ये मिर्ज़ा
जो तेरे नूर में भीगे
आशिक़ी
मेरी भी रगों में समायी
जो कतरा बहा दे
दर्द -ए-दिल
न समझे
तू क्या जाने
शुक्राना करें अदा
उस खुदा का
सल्तनत में जो
उसने की
हुस्न की रुबाई !-२२.०४.२०१६
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