Monday, 7 November 2016

बेजुबान जिंदगी

वक्त का तराजू
इजाजत की गुंजाइश
आज लहर उठाती यादें 
इन्तेजार की राह पे 
बेजुबान जिंदगी !-०७.११.२०१६

Sunday, 6 November 2016

रूबरू

अरसो बाद रूबरू हुए
यूँ तो रिश्ता ये बरसो का
जाने अनजाने अजनबी बन से गए थे
वही सूनापन वही खामोश जुबान
आज फिर रूबरू !-०७.११.२०१६ 

इश्क़ का पता

सवाल कतारो से 
जवाब दू भी तो किसे 
सब अपने 
या तो है 
या तो बनने वाले है 
वासुदेवं कुटुम्बकम
प्यार की जुबान
कमजोर नही
बस महफूज़ रखता है
इश्क़ का पता !-०६.११.२०१६