Friday, 1 April 2016

सनम तेरी कसम....

वो लम्हे तेरे साथ
मानो जिंदगी गुजर जाये
इन लम्हों की यादें
कुछ ऐसे महकाये
वक़्त का मंजर
कुछ यूँ थम जाएं
रात की परवाह
जुगनू को क्या
जब तुम साथ हो
दामन तेरा
मेरा हाथ
बहती हवाएं बदले रुख
किसकी अदालत किसका हक़
जो वक़्त ने चाहा
तो खुदा गवाह
सनम तेरी कसम ! - ०२.०४.२०१६

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