Sunday, 4 December 2016

ख्वाबो का बोझ

यूँ तो तेरी  यादें
साँसे महकाती है
पर न जाने क्यों
आँखे भर सी आई
ख्वाबो का बोझ
आंसू रख न सके ! - ०४.१२.२०१६ 

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