Sunday, 31 July 2016

मजबूर इश्क़

कहने को
इश्क़ मजबूर नहीं
मज़बूरी जुड़ी है तो
इन आँखों से
गवारा नहीं इसे
कोई और चेहरा !-०१.०८.२०१६

विरासत

खुदा तेरी ये कैसी विरासत
यु तो तूने इतनी वफ़ा दी
जब भी निभाई पलके भीगा दी !-३१.०७.२०१६

हर लम्हे में

तहे दिल से
ये दुआ
दुआ यूँ
तेरी वफ़ा !
मेरे ख्वाबो में
तेरी महक
मेरा हर
अहसास तुझसे जुड़ा !
मेरी पलकों पे हो
तेरा हर अश्क !
तेरे बिना न बीतें
मेरा कोई लम्हा !
मेरी दुआ हो मुकम्मल
हर लम्हे में
तुझे खुदा मांगू ! - ३१.०७.२०१६

कभी नजर मिलाओ

कभी नजर मिलाओ
फुरसत में
पलके हमारी
आज भी भीगा जाती
आपकी यादें !-३१.०७.२०१६

हर मौसम

हर मौसम है तुझसे जुड़ा
हर मौसम हो तेरी मुस्कान की तरह !-३१.०७.२०१६

Wednesday, 27 July 2016

अजीब सा सौदा

नींद से आँखों का
अजीब सा सौदा है !
भीगी पलके
लब मुस्कराये भी तो
उसे याद करके !-२८.०७.२०१६ 

पराया हक़

गुजर जाये
आज फिर से ये रात
कल भी चाँद होगा फलक पे
ख्वाब तेरे होंगे
हक़ खो चुके होंगे हम
लाजमी नहीं हमें आज भी पराया !-२८.०७.२०१६

बचपन की कीमत

उसने बचपन खोया
कीमत थी मासूमियत की !
वो आज भी नादान है
दुनिया उसे शायर करार दे बैठी !-२७.०७.२०१६

तेरी मुस्कान

हर सितम मंजूर है 
तेरी मुस्कराहट की इबादत में !-२७.०७.२०१६

Sunday, 24 July 2016

इबादत

जो कुछ अनकही
वो समझ न सके
खामोशियों की जुबान
हम कह न सके
मजबूर थी निगाहे
जो इबादत से
उठी
वही नजर आये ! - २५.०७.२०१६ 

अधूरे तेरे बिना

अहसास कुछ यूँ था
लाख मनाये फिर भी
उसी का जूनून था
इश्क़ कुछ
इस तरह था
उसके सिवा हम अधूरे थे !-२४.०७.२०१६ 

Saturday, 23 July 2016

सावन के बादल

यु तो हर एहसास है अधूरा 
न तू हो मौजूद जहां 
सावन के ये बादल
प्यासी जमीं भला बताये भी तो कैसे 
कितने अधूरे हम 
तेरे बिना !-२४.०७.२०१६

Friday, 22 July 2016

पवित्र संगम

वो जो जस्बातों की बातें करते है 
कभी पूछिए 
कच्चे धागों से क्यों बांधे उन्होंने रिश्ते 
हर संगम होता पवित्र 
यूँ ही नहीं हम उनसे मिले !-२३.०७.२०१६

मुसाफिर भी;आशिक़ भी

एक कशिश सी है 
मुसाफिर भी हु आशिक़ भी !-२२.०७.२०१६

Wednesday, 20 July 2016

बेखुदी

किसी की बेखुदी थी
जो हम भी पत्थर दिल हो गए
वरना गुलो के मौसम
हमने भी कांटे सहे गुलाबो के !-२१.०७.२०१६

बेजुबान

वफ़ा के नसीब में
लिखें जो इतने सितम
करूँ कैसे बयां
तुझसे इश्क़ है कितना !-२०.०७.२०१६

Tuesday, 19 July 2016

वफ़ा की उम्मीद

वफ़ा की उम्मीद नहीं
तुझसे !
वो बोतल वफादार है
टूट के बिखर जाती है !
बिखरे हुए हम
वफ़ा की उम्मीद नहीं
तुझसे !-१९.०७.२०१६ 

तेरी बिरहा ने

आग से इन दिनों
ठंडक है मिलती
तेरी बिरहा ने जो
इतना जलाया !-१९.०७.२०१६ 

Monday, 18 July 2016

इबादत...

अच्छे नहीं लगते
वो चौदवी का चाँद
हम कीचड़ के कमल
जरुरी नहीं हर साथ
ज़माने की गवारा हो
याद कर
कभी अपनी तन्हाइयो में
खुद को भुला कर
बुलंदी मिले हमारी इबादत को !-१९.०७.२०१६

मुड़ के न देख

मुड़ के न देख
की अब इरादा बदलना नहीं
मंजूर है हर शिकवा गिला
तेरे चेहरे पे गम जायज नहीं !-१९.०७.२०१६ 

Thursday, 14 July 2016

ऐतबार

इंतजार नहीं करते
ऐतबार हो जिनपे
हमेशा से वो अपने ही थे
लकीरो में नहीं दिल में सही !- १५.०७.२०१६ 

Monday, 11 July 2016

अधूरी हसरत

वो अधूरी हसरत
मुक़द्दर ने जिसे
इश्क़ का नाम दिया !
तेरी अश्कों की कसम
हर दुआ में हमने
तेरा ही नाम लिया !
मुसाफिर तो यु
सभी है यहाँ
फिर भी हम तुमसे मिले !
कसूर था तो इतना
चाहत की हसरत
अधूरे बयां !-१२.०७.२०१६ 

Sunday, 10 July 2016

लम्हे गिनते हुए

हम वफ़ा के मारे
उनसे इश्क़ लड़ा बैठे
वो जो गैर की अमानत !
हम अमन के रखवाले
नफरत हमें जायज कहाँ !
वो मकबरा जो मोहब्बत का
जिसे जमाना ताज बुलाता है !
हम लम्हे गिनते हुए
वो अनजाने में खुदा बदल बैठे !-११.०७.२०१६ 

‪#‎फितरत‬

ऐ ग़ालिब 
बुझ गयी शाम 
जिसके इंतजार में 
रह गए बरसते बादल
मजबूर थे हालातों से हम
वरना इंतजार कहाँ हमारी फितरत में !-११.०७.२०१६

‪#‎शुक्रिया‬

आपकी वफ़ा ने 
हमें 
फिर से शायर बना दिया !
मोहताज हुआ करते थे
काफिर से
खुदा बना दिया !-११.०७.२०१६

दास्ताँ-ए-वफ़ा

निभाने को तो 
जिंदगी का भी साथ निभाते रहे 
कभी वक़्त गुजरा 
तो कभी आंसू बहाते रहे !
एक सुकून सा था उनकी यादों में
जो हम पन्ने दर पन्ने लिखते गए !
अजीब सी कशमकश थी
वो अपनाके
पराया जताते गए !
यूँ तो ऐतबार था हमें अपने इश्क़ पे
फिर भी हम
बहते अश्को से पन्ने भिगाते गए
उन्हें मिटाते गए ! - ११.०७.२०१६

बेजुबान

इंतजार का इंतेहां लेना तो कोई आपसे सीखे हुजूर
कभी प्यार की आंधी आपको एहसास दिलाये
हमारे लफ्ज़ो में वो काबिलियत कहाँ !-११.०७.२०१६ 

Saturday, 9 July 2016

इंतजार

तुम्हारी नजरे कहती है
अब उन्हें शिकवा नहीं
हम अपने दिल को समझाए कैसे
इंतजार नहीं करते वो मुसाफिर थे !-०९.०७.२०१६ 

उनकी एक नजर

शायद वो समझे नहीं 
हम आशिक़ थे 
मुजरिम नहीं !
इश्क़ हमारा मज़हब
अल्फाज़ ना थे
भला जताते कैसे !
उनकी एक नजर
काफी थी
रूह को इबादत मिल गयी !-०९.०७.२०१६

Wednesday, 6 July 2016

यादों की नौका

कमजोर न समझना 
यादों को
इसी नौका में 
देखे हमने 
जिंदगियों को बीतते !-०६.०७.२०१६

Tuesday, 5 July 2016

काफिर

सोचता हु 
एहसास पुछु उनसे 
खुदा होने का 
जिनकी इबादत में 
हम काफिर बन गये !-०५.०७.२०१६

Monday, 4 July 2016

तमन्ना

तमन्ना इतनी सी
आंखरी सांस तक
तुझसे यूँ ही मोह्हबत करू
कभी न नम हो तेरी आँखें
जायज नहीं लगता गम से तेरा रिश्ता !-०४.७.२०१६ 

Sunday, 3 July 2016

कांच के टुकड़े

कितने ही रिश्ते बने
कितने बिखर गये
कदर थी तो उन मोतियों की
भला कांच के टुकड़े कब आपस में जुड़े !-०४.०७.२०१६