Monday, 20 June 2016

कुछ यूँ मिली नजर

वो भीगे अल्फाज
बरसो से तरसते
नजर के मंजर
नजर झुका कर
चला करते थे
कही टकरा न जाये
किसी मोड़ पर
बादल थे
छुप गया था चाँद
बादलों में
जो नजर उठाई हमने
हुए रूबरू
कुछ यूँ मिली नजर !-२०.०६.२०१६

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