Saturday, 27 August 2016

सवाली

हम कलम लिये 
हाथ में 
कोरा कागज मानो 
सवाली !
लिखते रहे 
मिटाते रहे
खामोश नजरे बेजुबान !
रूबरू हुए
जो उनसे
मानो शिशे से टकराये !
एक वो दिन था
बिखर गये
फिर वही बरसात !
धुंदली आँखें
ना जाने
कितनी दास्ताएं अनकही !
मुड़ के ना देखा
हमने
जिस राह को !
आज वही आ रुके
उन्ही से मिले
जहा बिछरे थे !-२७.०८.२०१६

Tuesday, 23 August 2016

कर्ज

तकल्लुफ़ अदा करे 
कदरदान ये दिल 
आपका भी कर्जदार है !-२३.०८.२०१६

Sunday, 21 August 2016

पहेली

कसूर इश्क़ का था
या वक़्त का
पहेली यूँ
मानो उम्र बीत गयी !-२२.०८.२०१६

Tuesday, 16 August 2016

गुफ्तगू

गुफ्तगू  न हुई
रुस्वा मानो
चाँद जुल्फों से
एक झलक जो दिखे
मुस्कराता उनका चेहरा
तेरा गिला दामन छूते मेरे लव
भूल ही जाते सांस लेना
जो न फकत
आपकी धड़कने छू जाती !-१७.०८.२०१६

Sunday, 14 August 2016

आशिक़ दिल

चोट गहरी थी 
गहरे ज़ख्म 
इंसान को अक्सर बदल देते हैं
वो करीब आये 
इजाजत दी मोहब्बत कर 
आशिक़ दिल
यादों की दास्ताँ लिखे
भला कब तक ! - १४.०८.२०१६

Saturday, 13 August 2016

पाबन्दी

वक़्त की पाबन्दी
कुछ यूँ थी
यादें उनकी हर पल में शामिल
सिर्फ वो न मिल पाए !-१३.०८.२०१६

Tuesday, 9 August 2016

मुकम्मल न था

बस उनके दिल को ठंडक मिले
इल्जाम मंजूर था
जिद कुछ यूँ थी
उन्हें खो दे
मुकम्मल न था !-१०.०८.२०१६

अँधेरे की गहराई

वो जो आफ़ताब के
राह पे रुके
उन्हें डर क्या
अँधेरे की गहराई से !-१०.०८.२०१६

गुरुर...

उन्हें गुरुर यह
"रात चांदनी से रौशन"
हमने उजालो से
मुह मोड़ लिया !-१०.०८.२०१६

Friday, 5 August 2016

नफरत का इज़हार

तेरी ख़ामोशी को मुक़द्दर मान लेते
नफरत का इज़हार तेरी आँखों में कहाँ !-०६.०८.२०१६

जस्बात

वो खुद से ही
बाते किया करती
एक अपनापन था मानो
ये रात उसे प्यारी थी
मैं वाकिफ था
हर उस पहलु से
जिसे वो ख्वाब कहती थी
प्यार करती थी वो मुझसे
आफ़ताब भी भला छुपाये कैसे
अपने जस्बात हम भी बयां करते रह गए !-०६.०८.२०१६

इज़हार

इश्क़ का इज़हार करते उनसे
अल्फ़ाज़ अधूरे रहते
भीगी पलकों पे इजाजत लक लिहाज
पराये वो नही
यु समझिये
जता न पाए जस्बात !-०५.०८.२०१६

Wednesday, 3 August 2016

जिंदगी और मोहब्बत

अंजाम तो जिंदगी भी 
मौत का ही देती है 
मोहब्बत तो 
खूबसूरत यादों का सफर था ! - ०३.०८.२०१६