Friday, 5 August 2016

जस्बात

वो खुद से ही
बाते किया करती
एक अपनापन था मानो
ये रात उसे प्यारी थी
मैं वाकिफ था
हर उस पहलु से
जिसे वो ख्वाब कहती थी
प्यार करती थी वो मुझसे
आफ़ताब भी भला छुपाये कैसे
अपने जस्बात हम भी बयां करते रह गए !-०६.०८.२०१६

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