Friday, 16 November 2018

जावेदां

हुजूर
क़तल भी हो जाये !
गम नहीं
गुनाह कबूल हमें !
मौत तो
मुक़म्मल है जनाब !
जावेदां वो रूह
जो घायल हुए 
उन नज़रों से ! - १६.११.२०१८   

Monday, 5 November 2018

रंजिशे सही

रंजिशे सही 
ऐतबार रखिये ग़ालिब
जिंदगी है 
सांसे भी लेनी है 
नजरे भी मिलानी है 
यूँ तो अजनबी
जिंदगी भी है
मुकम्मल
एकदिन मौत भी है
कुछ यूँ हो जस्बात
मुस्कुराते रहे हमेशा
क्या पता
किसीको जीने की वजह मिल जाये !

Friday, 2 November 2018

काबा भी मुझमे

क्या क्या मांगू
खुदा से
इबादत भी उसकी
नुमाइश भी उसकी
दस्तूर है तो
बस नजरो का 
काफिर भी मै
काबा भी मुझमे !-०२.११.२०१८