Saturday, 9 April 2016

हमारी चाहत

वो मुस्कुराहत थी तेरी
या थे दिल में दबे आंसू
नजरो छुं भी ले
चाहे भी तो कैसे कहें
हमने भी तो चाहा है
माना हमारी चाहत
खुदा को कबूल नहीं !-१०.०४.२०१६

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