जो होंठ छू गए
तुझे
बेवफा जिंदगी कि
आरज़ू
न रही
गम ही क्या
जो
दस्तूर-ए-वफ़ा
जिंदगी
भीगा दे पलकों को
लम्हें जो तेरे साथ बीतें
काटली हमने सदियाँ !-२५.०५.२०१६
तुझे
बेवफा जिंदगी कि
आरज़ू
न रही
गम ही क्या
जो
दस्तूर-ए-वफ़ा
जिंदगी
भीगा दे पलकों को
लम्हें जो तेरे साथ बीतें
काटली हमने सदियाँ !-२५.०५.२०१६
No comments:
Post a Comment