Saturday, 17 December 2016

तेरा नाम

तमन्नाओ
की सुनो तो
बातें रह गयी अधूरी !
कुछ तो हसरत होती 
अगर
तू साथ होती !
चंद इन लम्हों में
हमने
उम्र गुजार ली होती !
यूँ तो गुजरे
 कितने ही मंजर
अपनी पहचान छुपाते
हम अधूरे रह गये !
भुला भी देते
एक पलकों तुझे
कमजोर दिल
मजबूर आँखें !
ख्वाईशो के हर पन्ने पे लिखी
मैंने अपनी आरजू
हर आरजू पे
तेरा नाम !-१७.१२.२०१६

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