Saturday, 30 April 2016

मुर्दे की परछाई

मौत के सफर पे
जिंदगी का दौर
किसने देखे शमशान के आंसू
मुर्दे की परछाई ! - ३०.०४.२०१६

Wednesday, 27 April 2016

तूने जो ना कहा

शिकवा क्या करें 
वो वक़्त की साजिस थी 
किस्मत की लकीर पे 
ऐतबार न रहे 
इश्क़ जूनून कुछ यूँ 
बीतें ज़माने सुलझाते 
जिन लटों को
दिलाशा न सही
उम्मीदों की मसान
दिल -ए-नादान
तेरे लिए मुकम्मल थे
यु तो हर गम भी
तूने जो ना कहा
रोक न सकें अश्को को !-२७.०४.२०१६

Tuesday, 26 April 2016

आखरी तो नहीं

जहां यादें जुड़ी
रास्तें मुड़ गये
वो आखरी तो नहीं
लेकिन अनकही उसी से जुड़ गयी !-२६.०४.२०१६ 

अकेले हम खड़े

वो अनकही रह गयी
वो रह गए अजनबी
मुड़ गए रास्तें जहां
आज भी वही अकेले हम खड़े !-२६.०४.२०१६

Monday, 25 April 2016

वफ़ा का इकरार

कुछ इस तरह
खफा थे नगमे
हम थे लफ़्ज़ों की
तलाश में
भुला ना सके
जिस मंजर को
न जाने कब
पलके भीगा गयी
हो
लफ्ज़ -ए-बयान
को नामंजूर
कोई
करे भी तो कैसे
वफ़ा का इकरार !-२५.०४.२०१६

Saturday, 23 April 2016

कुछ इस तरह...

कुछ इस तरह 
वफ़ा के सुरूर में दुबे 
वक़्त का ना होश रहा !
सदियाँ बीत गयी 
जिसकी तलाश में 
वो मिले भी तो
दस्तक देते दरवाजे पे !-२३.०४.२०१६

Friday, 22 April 2016

तुझमे फना

जो बीतें तेरे साथ
वो वक़्त हो मेरे
तेरी खुली जुल्फें
बादल घने बरसे
परवरदिगार हो यलगार
इतनी सी बरसे उसकी रहमत
हो जाये जो तुझमे फना
होश न आये फिर हमें !-२२.०४.२०१६ 

शुक्राना

बंदिशे थी कुछ युँ
मदहोश
उन आँखों का सुरूर
कौन है ग़ालिब
कौन ये मिर्ज़ा
जो तेरे नूर में भीगे
आशिक़ी
मेरी भी रगों में समायी
जो कतरा बहा दे
दर्द -ए-दिल
न समझे
तू क्या जाने
शुक्राना करें अदा
उस खुदा का
सल्तनत में जो
उसने की
हुस्न की रुबाई !-२२.०४.२०१६ 

Wednesday, 20 April 2016

तेरा नाम रहे

कल भी बीतें
आज भी बीतें
यूँ ना बीतें
जो तेरे साथ बीतें !
जानू ना
क्या नाम दू
इस
कस्मकस को !
बुलाऊ तुझे
ईश्क़
या वफ़ा को
सुरूर का नाम दू !
न भुलाए गये
जो बीतें
ना भूलेंगे तेरे साथ के साये !
कहने को तो
ये अल्फाज़
रहे हमेशा बेजुबान !
दुआ इतनी सी
ना बीतें ये पल
बस यूँ ही
हम रहे
या ना रहे
दुआओं में
तेरा नाम रहे !-२०.०४.२०१६

Sunday, 10 April 2016

रूबरू

हम ज़माने से न हुये रूबरू 
और आप ने समझा 
हम रौशनी के लायक नहीं !-१०.०४.२०१६

अंदाज़ ए बयां

अंदाज़ ए बयां 
कुछ यु था 
वक़्त की महफ़िल 
अरमानो का जुनु(न) था 
यु तो न पीछे मुड़
देखा हमने
साहिल भी परछाई
से हुए खफा
हम चलते गए
कारवां जुडते गए !-१०.०४.२०१६

Saturday, 9 April 2016

हमारी चाहत

वो मुस्कुराहत थी तेरी
या थे दिल में दबे आंसू
नजरो छुं भी ले
चाहे भी तो कैसे कहें
हमने भी तो चाहा है
माना हमारी चाहत
खुदा को कबूल नहीं !-१०.०४.२०१६

Monday, 4 April 2016

भूले से ही

जो बीत गये
वो तेरे
जो साथ जुड़े
वो तेरे
लम्हा भर
जो तू हो साथ
वो वक़्त हो मेरे !
तनहा तो यूँ
जीते आये
सदियाँ !
आज दिखा
वक़्त का मंजर
न जाने
रुका हुआ कबसे !
शायर की मज़बूरी
तेरी जुल्फ के साये !
कुछ इस तरह
शाम ढली
न वक़्त रुका
परिंदे लौट गये !
राहों में तेरी
आज भी बिछी
नजरे हमारी
कभी आ जाना
भूले से ही !-०४.०४.२०१६

Friday, 1 April 2016

सनम तेरी कसम....

वो लम्हे तेरे साथ
मानो जिंदगी गुजर जाये
इन लम्हों की यादें
कुछ ऐसे महकाये
वक़्त का मंजर
कुछ यूँ थम जाएं
रात की परवाह
जुगनू को क्या
जब तुम साथ हो
दामन तेरा
मेरा हाथ
बहती हवाएं बदले रुख
किसकी अदालत किसका हक़
जो वक़्त ने चाहा
तो खुदा गवाह
सनम तेरी कसम ! - ०२.०४.२०१६