Sunday, 26 April 2015

कशिश...

कल हमने सोचा न था 
आज आपने मजबूर कर दिया !- २ १. ०४ .२०१५

Saturday, 18 April 2015

ये तो...

ये तो कहने वाले भी जानते है
हम सुनते अपनी मन की है !-१८.०४. २०१५ 

Wednesday, 15 April 2015

हम शामिल न होते ....

हम शामिल न होते 
उस महफ़िल में 
जिसमे शमा न हो !
वो मंजर ही क्या
जिसके दस्तूर जाम में डूबे हो 
जहा तन्हाई न हो !
हम अक्सर मिला करते हैं
उन महफ़िलों में
जहाँ जाम होंटो से नहीं
आँखों से पिलाये जाते हो !-१५। ०४। २०१५

हमने खुदाई मानली.....

हम कहा काबिल थे 
जो आपसे 
हमारी नजरे मिलें
जाहा सजदे में 
सर झुके 
वही खुदा नजर आये !
ये तो खुदा का
फरमान था
जो चाँद उतरा जमीन पे
और जुगनू छुपे बादलों में
ये इश्क़ नहीं तो क्या
इसी कसक को हमने खुदाई मानली ! -१५। ०४। २०१५

हो न सके.....

आपने अपनाया नहीं 
हम पराये हो न सके !-१५। ०४। २०१५