Friday, 2 September 2016

जबसे तुझे छुया

जस्बातों की बंदिशे 
रूह को छूते लफ्ज़ 
बयां न हुए
फिर भी न जाने 
अनजाने में ही
दूरिया नजदीकियों में बदल गयी !
नूर की बारिश
खुली तेरी जुल्फें
तेरे बदन को छूते हम
चाँद से फिसलती चांदनी !
सजदा जो करू
तेरा चेहरा
इबादत मेरी यु तुझसे जुड़ी !
मज़हब बदल ले है मंजूर
पानी न छुया इन होंटो ने जबसे तुझे छुया !-०२.०९.२०१६

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