शायद वो समझे नहीं
हम आशिक़ थे
मुजरिम नहीं !
इश्क़ हमारा मज़हब
अल्फाज़ ना थे
भला जताते कैसे !
उनकी एक नजर
काफी थी
रूह को इबादत मिल गयी !-०९.०७.२०१६
हम आशिक़ थे
मुजरिम नहीं !
इश्क़ हमारा मज़हब
अल्फाज़ ना थे
भला जताते कैसे !
उनकी एक नजर
काफी थी
रूह को इबादत मिल गयी !-०९.०७.२०१६
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