शिकवा क्या करें
वो वक़्त की साजिस थी
किस्मत की लकीर पे
ऐतबार न रहे
इश्क़ जूनून कुछ यूँ
बीतें ज़माने सुलझाते
जिन लटों को
दिलाशा न सही
उम्मीदों की मसान
दिल -ए-नादान
तेरे लिए मुकम्मल थे
यु तो हर गम भी
तूने जो ना कहा
रोक न सकें अश्को को !-२७.०४.२०१६
वो वक़्त की साजिस थी
किस्मत की लकीर पे
ऐतबार न रहे
इश्क़ जूनून कुछ यूँ
बीतें ज़माने सुलझाते
जिन लटों को
दिलाशा न सही
उम्मीदों की मसान
दिल -ए-नादान
तेरे लिए मुकम्मल थे
यु तो हर गम भी
तूने जो ना कहा
रोक न सकें अश्को को !-२७.०४.२०१६
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