वाकिफ तो यूँ हु मैं
इश्क़ के अंजाम से
चाहता हू तो बस
वसीहत में इश्क़ लिखा हो !
यूँ तो शौक
और भी है ज़माने में
मगर कम्बख्त एहसास
तराजू से न तुलते ! -०७.०७.२०२०
इश्क़ के अंजाम से
चाहता हू तो बस
वसीहत में इश्क़ लिखा हो !
यूँ तो शौक
और भी है ज़माने में
मगर कम्बख्त एहसास
तराजू से न तुलते ! -०७.०७.२०२०
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