Thursday, 16 July 2020

बचपन

वो भी एक शहर था
जिसमे मेरा घर था
एक खुला सा आँगन
जिसे सब बचपन कहते थे
फिर अचानक एकदिन
अंधेरा छा गया
फिर जब सवेरा हुआ
वो खुला आँगन न रहा
बेघर मैं मेरे साथ सड़क की धूल !-१६.०७.२०२० 

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