Thursday, 9 July 2020

गुलिस्तां

झरोखे को आसमान 
समझ बैठे 
नाजुक से थे वो पल 
जो तुझे अपना समझ बैठे !
इरादा था आखिर 
साथ निभाने का 
तू न सही 
तेरी यादें का गुलिस्तां बना बैठे !-०९.०७.२०२० 

No comments:

Post a Comment