एक राह सी थी
जिसकी मंज़िल न मिली
एक किनारा सा था
कस्ती जहा कस्मकस में थी
मकसद तो यू मंज़िल तक का था
रास्ते रुस्वा थे हमसे
जो हम सफर तय न कर सके !-१७.०७.२०२०
जिसकी मंज़िल न मिली
एक किनारा सा था
कस्ती जहा कस्मकस में थी
मकसद तो यू मंज़िल तक का था
रास्ते रुस्वा थे हमसे
जो हम सफर तय न कर सके !-१७.०७.२०२०
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