Thursday, 16 July 2020

मुकम्मल

एक दर्द जो मुकम्मल है
शायर की मानो तो
ज़िन्दगी का आखरी पन्ना
जिसे मौत कहते है
मुकम्मल हो वो हर तलाश
जो तेरे आगोश में सिमट जाऊ !-१७.०७.२०१७ 

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