शिकायत नही
उस कायनात से
जो मुकम्मल न हो
दुआ में फिर भी तू
गुजारिश कुछ यूँ हो
तुझे न देखे मेरी नजरे
उस रात की न सुबह हो ! - २७.०१.२०१७
उस कायनात से
जो मुकम्मल न हो
दुआ में फिर भी तू
गुजारिश कुछ यूँ हो
तुझे न देखे मेरी नजरे
उस रात की न सुबह हो ! - २७.०१.२०१७
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