Monday, 29 June 2015

ऐतबार-ए -वफ़ा

आज एहसास हुआ हमें 
ये चांदनी भी शायद 
किसी के वफ़ा की मारी हो 
वरना रात को ही क्यों नजर आती 
ऐतबार-ए -वफ़ा 
दुनिया से छुपाती !-२८। ०६। २०१५  

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