कुछ अल्फ़ाज़ आंसू बने
कुछ नग्मे बने लम्हे !
हम उनसे भी मिले गले
जिन्होंने लम्हों में लिखी दास्ताँ !
सादिया जीना हमें कहा लाजमी
जो हम शायर बने ! - २४। ०६. २०१५
कुछ नग्मे बने लम्हे !
हम उनसे भी मिले गले
जिन्होंने लम्हों में लिखी दास्ताँ !
सादिया जीना हमें कहा लाजमी
जो हम शायर बने ! - २४। ०६. २०१५
No comments:
Post a Comment