Wednesday, 24 June 2015

हम भी शायर बने...

कुछ अल्फ़ाज़ आंसू बने
कुछ नग्मे बने लम्हे !
हम उनसे भी मिले गले
जिन्होंने लम्हों में लिखी दास्ताँ !
सादिया जीना हमें कहा लाजमी
जो हम शायर बने ! - २४। ०६. २०१५


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