Saturday, 4 October 2014

वो कशिश क्या....

वो कशिश 
क्या....
जो लफ़्ज़ों में बयान हो !
वो आशिक़ी क्या 
जो शब्दों में समाये !
अधूरी बातें
अधूरी रहें !
तू क्या समझे
शायर की जुबानी
दास्ताँ ये अधूरी
अधूरी सदा के लिए !-०४। १०। २०१४

No comments:

Post a Comment