तेरे बिना ,हर पल,हर दिन,हर मंजर तेरे बिना !तुझे छूके गुजरे हवाये ;मेरी नजर आज भी तुझे ढूंढे !
हर लम्हा तेरी यादों का कर्जदार रहे ये मेरा दिल ;भुला न पाएंगे तुझे तू याद करे न करे तेरी यादों के सहारे ये जिंदगी बितानी हमने बस इतनी सी ख्वाहिश !मेरे दिल के कुछ चंद अरमान ;कुछ लफ्ज़ कुछ लम्हें जिन्हे शायद वक़्त से पहले कोई न समझ पाया न कभी पायेगा !इस न चीज की नुमाइश
आप सब के सामने ,उम्मीद रखता हु आप सब को पसंद आये !
Saturday, 4 October 2014
वो कशिश क्या....
वो कशिश क्या.... जो लफ़्ज़ों में बयान हो ! वो आशिक़ी क्या जो शब्दों में समाये ! अधूरी बातें अधूरी रहें ! तू क्या समझे शायर की जुबानी दास्ताँ ये अधूरी अधूरी सदा के लिए !-०४। १०। २०१४
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