Sunday, 2 April 2017

यादों की बात

जायज है तेरा शिकवा 
बेवफा तू नही 
रातें तो यूँ ही बीत जाती है 
क्यों कोई समझा नही 
यादों की बात ही कुछ और है 
पता नहीं कब किसे अपनाये
हम तो आवारा फिरते सड़को पर
न जाने कैसे कारवाँ जुड़ जाये !-०३.०४.२०१७

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