Thursday, 20 August 2015

जीने लगा हूँ ......

कुछ इस अदा से
"जालिम" 
बुलाया उन्होंने 
हमें
न कह सके 

क़तल करे कोई 
इन अदाओं से !
सांसों को जुड़ा करे 
धड़कनो से !
इस बेजुबान दिल की 
जुबान बने कोई !
और इल्जाम हम पे 
की हमने जुल्म ढाये उनपे !

हुजूर 
खता तो बस 
इतनी सी थी हमारी

कह दिया आपने 
हम दिल की बात 
जुबान पर ला न सके !!!-२०। ०८। २०१५

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