हम शामिल न होते
उस महफ़िल में
जिसमे शमा न हो !
वो मंजर ही क्या
जिसके दस्तूर जाम में डूबे हो
जहा तन्हाई न हो !
हम अक्सर मिला करते हैं
उन महफ़िलों में
जहाँ जाम होंटो से नहीं
आँखों से पिलाये जाते हो !-१५। ०४। २०१५
उस महफ़िल में
जिसमे शमा न हो !
वो मंजर ही क्या
जिसके दस्तूर जाम में डूबे हो
जहा तन्हाई न हो !
हम अक्सर मिला करते हैं
उन महफ़िलों में
जहाँ जाम होंटो से नहीं
आँखों से पिलाये जाते हो !-१५। ०४। २०१५
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