Wednesday, 15 April 2015

हम शामिल न होते ....

हम शामिल न होते 
उस महफ़िल में 
जिसमे शमा न हो !
वो मंजर ही क्या
जिसके दस्तूर जाम में डूबे हो 
जहा तन्हाई न हो !
हम अक्सर मिला करते हैं
उन महफ़िलों में
जहाँ जाम होंटो से नहीं
आँखों से पिलाये जाते हो !-१५। ०४। २०१५

No comments:

Post a Comment