नींद तो इन दिनों
हमें भी नहीं आती
हसीं जुल्फें सवार्ति
तेरी तस्वीर नजर आती !
यूँ तो खुदा से हमने
न मांगी थी जिंदगी !
फिर भी न जाने क्यों
तेरी बंदगी में रातें गुजर जाती !-१६। ०१. २०१५
हमें भी नहीं आती
हसीं जुल्फें सवार्ति
तेरी तस्वीर नजर आती !
यूँ तो खुदा से हमने
न मांगी थी जिंदगी !
फिर भी न जाने क्यों
तेरी बंदगी में रातें गुजर जाती !-१६। ०१. २०१५
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