Saturday, 24 May 2014

चाँद और चांदनी

चांदनी से पुछा मैंने 
बताना 
ये चाँद कहा मिलेगा !
चांदनी मुस्करा के बोली 
कैसे इंसान हो 
जो 
मेहबूबा से 
सौहोर का पता पूछते हो !
जिसकी तस्वीर नज़र में हो 
जिसकी एहसास साँसों में हो 
भला वो कैसे दिल के अलावा 
धड़कन से जुदा हो !-२४.०५.२०१४

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