चांदनी से पुछा मैंने
बताना
ये चाँद कहा मिलेगा !
चांदनी मुस्करा के बोली
कैसे इंसान हो
जो
मेहबूबा से
सौहोर का पता पूछते हो !
जिसकी तस्वीर नज़र में हो
जिसकी एहसास साँसों में हो
भला वो कैसे दिल के अलावा
धड़कन से जुदा हो !-२४.०५.२०१४
बताना
ये चाँद कहा मिलेगा !
चांदनी मुस्करा के बोली
कैसे इंसान हो
जो
मेहबूबा से
सौहोर का पता पूछते हो !
जिसकी तस्वीर नज़र में हो
जिसकी एहसास साँसों में हो
भला वो कैसे दिल के अलावा
धड़कन से जुदा हो !-२४.०५.२०१४
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